गुरूनहत्वा हि महानुभावान् श्रेयो भोक्तुं भैक्ष्यमपीह लोके | हत्वार्थकामांस्तु गुरूनिहैव भुञ्जीय भोगान् रुधिरप्रदिग्धान्
gurūnahatvā hi mahānubhāvān śreyo bhoktuṃ bhaikṣyamapīha loke . hatvārthakāmāṃstu gurūnihaiva bhuñjīya bhogān rudhirapradigdhān
Rather than killing the noble-minded elders, it is better in this world to live even on alms. But by killing the elders we shall only be enjoying here the pleasures of wealth and desireable things drenched in blood.
इन महानुभाव गुरुजनों को मारने से इस लोक में भिक्षा का अन्न भी ग्रहण करना अधिक कल्याण कारक है, क्योंकि गुरुजनों को मारकर मैं इस लोक में रक्तरंजित अर्थ और काम रूप भोगों को ही भोगूँगा।।
. It is good indeed even to go about begging in this world without killing the elders of great dignity; but with greed for wealth, I would not enjoy, by killing my elders, the blood-stained objects of pleasures.
अत्यन्त उच्च प्रतीत होने वाले परन्तु वास्तव में अर्थशून्य तर्क अर्जुन पुन प्रस्तुत करता है क्योंकि स्वयं को न समझने के कारण वह अपनी समस्या को भी नहीं समझ पाया है।यहाँ उसने अपने गुरुओं अर्थात् भीष्म और द्रोण को महानुभाव कहा है जिसका अर्थ है अपने युग के आदर्श पुरुष। अपनी संस्कृति में जो कुछ उच्च और श्रेष्ठ है उसके वे प्रतीक स्वरूप हैं जिन्होंने विशाल और उदार अन्तकरण से सनातन धर्म के लिये अनेक प्रकार के त्याग किये। अपनी संस्कृति के ऐसे श्रेष्ठ आदर्श युगपुरुषों का नाश केवल व्यक्तिगत शक्ति एवं पदलिप्सा के लिये करना किसी प्रकार उचित नहीं प्रतीत होता है। केवल वह युग विशेष ही नहीं बल्कि इन महापुरुषों के अमूल्य जीवनोच्छेद होने से भावी पीढ़ियाँ भी दरिद्र हो जायेंगी।अर्जुन कहता है कि संस्कृति के उपवन के सुन्दरतम् सुमनों को विनष्ट करने का विचार त्याग कर पाण्डवों के लिये भिक्षान्न पर जीवन यापन करना अधिक उचित होगा। इन गुरुजनों को मारकर प्राप्त किये गये राज्य का उपभोग भी वह नहीं कर सकेगा क्योंकि वे सब उनकी कटु स्मृतियों और मूल्यवान रक्त से सने होंगे जिनको विस्मृत कर पाना कठिन होगा।एक बार यदि हम परिस्थिति का त्रुटिपूर्ण आकलन कर लेते हैं तो भावनाओं के कारण हमारी बुद्धि पर आवरण पड़ जाता है और तब हम भी जीवन में अर्जुन के समान व्यवहार करने लगते हैं। इसका स्पष्ट संकेत व्यास जी द्वारा इस घटना में किये गये विस्तृत वर्णन में देखने को मिलता है।