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Gita / Chapter 9.5
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

न च मत्स्थानि भूतानि पश्य मे योगमैश्वरम् | भूतभृन्न च भूतस्थो ममात्मा भूतभावनः

Transliteration

na ca matsthāni bhūtāni paśya me yogamaiśvaram . bhūtabhṛnna ca bhūtastho mamātmā bhūtabhāvanaḥ

English

Nor do the beings dwell in Me. Behod My divine Yoga! I am the sustainer and originator of beings, but My Self is not contained in the beings.

Hindi

और (वस्तुत:) भूतमात्र मुझ में स्थित नहीं है; मेरे ईश्वरीय योग को देखो कि भूतों को धारण करने वाली और भूतों को उत्पन्न करने वाली मेरी आत्मा उन भूतों में स्थित नहीं है।।

Sanskrit
English
न
not
च
and
मत्स्थानि
dwelling in Me
भूतानि
beings
पश्य
behold
मे
My
योगम्
Yoga
ऐश्वरम्
Divine
भूतभृत्
supporting the beings
न
not
च
and
भूतस्थः
dwelling in the beings
मम
My
आत्मा
Self
भूतभावनः
bringing forth beings.
Hindi

पूर्व श्लोक में भगवान् श्रीकृष्ण ने कहा है कि समस्त भूत अर्थात् सम्पूर्ण चराचर सृष्टि उनमें स्थित है? परन्तु वे उसमें नहीं हैं। उसी विषय के तर्क की अगली कड़ी बताते हुए वे अब कहते हैं कि वस्तुत? वे भूत मुझमें स्थित नहीं हैं? अर्थात् अनन्त से सान्त की उत्पत्ति कभी नहीं हुई स्तम्भ और प्रेत के दृष्टान्त का पुन उपयोग करते हुए? भगवान् की उक्ति स्तम्भ के इस कथन के तुल्य होगी कि? वास्तव में? मुझ विद्युत् स्तम्भ में प्रेत का अस्तित्व कदापि नहीं था। अनन्त स्वरूप शुद्ध चैतन्य परमात्मा में इस नानाव