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Gita / Chapter 9.4
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

मया ततमिदं सर्वं जगदव्यक्तमूर्तिना | मत्स्थानि सर्वभूतानि न चाहं तेष्ववस्थितः

Transliteration

mayā tatamidaṃ sarvaṃ jagadavyaktamūrtinā . matsthāni sarvabhūtāni na cāhaṃ teṣvavasthitaḥ

English

This whole world is prevaded by Me in My unmanifest form. All beings exist in Me, but I am not contained in them!

Hindi

यह सम्पूर्ण जगत् मुझ (परमात्मा) के अव्यक्त स्वरूप से व्याप्त है; भूतमात्र मुझमें स्थित है, परन्तु मैं उनमें स्थित नहीं हूं।।

Sanskrit
English
मया
by Me
ततम्
pervaded
इदम्
this
सर्वम्
all
जगत्
world
अव्यक्तमूर्तिना
by the unmanifested form
मत्स्थानि
exist in Me
सर्वभूतानि
all beings
न
not
च
and
अहम्
I
तेषु
in them
अवस्थितः
placed.
Hindi

यह सम्पूर्ण जगत् मेरे अव्यक्त स्वरूप के द्वारा व्याप्त है किसी वस्तु की सूक्ष्मता उसकी व्यापकता से नापी जाती है और इसलिए सूक्ष्मतम वस्तु का सर्वव्यापक होना अनिवार्य है। देशकाल से परिच्छिन्न (सीमित) सभी वस्तुओं का आकार तथा नाश होता है अत सर्वव्यापी वस्तु निराकार और नाशरहित होगी। इस प्रकार आत्मतत्त्व अपने मूल अव्यक्तस्वरूप से सम्पूर्ण जगत् में व्याप्त है? जैसे मिट्टी के बने सभी रूपों और आकारों वाले घटों में मिट्टी व्याप्त होती है।यदि? इस प्रकार? अनन्तपरिच्छिन्न तत्त्व सान्त और परिच्छिन्न