Adiyogi Arts
सेवाएँअनुसंधानब्लॉगवीडियोप्रार्थनाएँ

खोजें

  • लेख
  • Topics
  • AI वीडियो
  • अनुसंधान
  • हमारे बारे में
  • परियोजनाएँ
  • गोपनीयता नीति

पवित्र ग्रंथ

  • भगवद् गीता
  • हनुमान चालीसा
  • रामचरितमानस
  • पवित्र प्रार्थनाएँ

भगवद् गीता अध्याय

  • 1.Arjuna Vishada Yoga
  • 2.Sankhya Yoga
  • 3.Karma Yoga
  • 4.Jnana Karma Sanyasa Yoga
  • 5.Karma Sanyasa Yoga
  • 6.Dhyana Yoga
  • 7.Jnana Vijnana Yoga
  • 8.Akshara Brahma Yoga
  • 9.Raja Vidya Raja Guhya Yoga
  • 10.Vibhuti Yoga
  • 11.Vishwarupa Darshana Yoga
  • 12.Bhakti Yoga
  • 13.Kshetra Kshetrajna Vibhaga Yoga
  • 14.Gunatraya Vibhaga Yoga
  • 15.Purushottama Yoga
  • 16.Daivasura Sampad Vibhaga Yoga
  • 17.Shraddhatraya Vibhaga Yoga
  • 18.Moksha Sanyasa Yoga
Adiyogi Arts
© 2026 Adiyogi Arts
भगवद् गीता / अध्याय 1 / श्लोक 14
← पिछलाअगला →

भगवद् गीता 1.14

हिन्दी
संस्कृत
अंग्रेज़ी
संस्कृत

ततः श्वेतैर्हयैर्युक्ते महति स्यन्दने स्थितौ | माधवः पाण्डवश्चैव दिव्यौ शङ्खौ प्रदध्मतुः

लिप्यंतरण

tataḥ śvetairhayairyukte mahati syandane sthitau . mādhavaḥ pāṇḍavaścaiva divyau śaṅkhau pradadhmatuḥ

हिन्दी

इसके उपरान्त श्वेत अश्वों से युक्त भव्य रथ में बैठे हुये माधव (श्रीकृष्ण) और पाण्डुपुत्र अर्जुन ने भी अपने दिव्य शंख बजाये।

English

Then, Madhava (Krsna) and the son of Pandu (Arjuna), stationed in their magnificent chariot with white horses yoked to it, loudly blew their divine conchs.

व्याख्या — हिन्दी

तथ्य अत्यन्त साधारण है कि कौरवों की शंखध्वनि का उत्तर भगवान् श्रीकृष्ण और अर्जुन ने शंखनाद करके दिया परन्तु संजय ने जिस सुन्दरता और उदारता के साथ इसका वर्णन किया है वह इस बात का स्पष्ट सूचक है कि उसकी सहानुभूति किस पक्ष के साथ थी। वह कहता है श्वेत अश्वों से युक्त भव्य रथ में बैठे माधव और अर्जुन ने अपने दिव्य शंख बजाये। इस वर्णन से ज्ञात होता है कि संजय के मन में कहीं कोई आशा अटकी है कि संभवत दोनों पक्षों के शंखनाद के वर्णनों में विरोध देखकर इस समय भी धृतराष्ट्र अपने पुत्रों को युद्ध से विरत कर लें।

संस्कृत
English
ततः
then
श्वेतैः (with)
white
हयैः
horses
युक्ते
yoked
महति
magnificent
स्यन्दने
in the chariot
स्थितौ
seated
माधवः
Madhava
पाण्डवः
Pandava
the
son of Pandu
च
and
एव
also
दिव्यौ
divine
शङ्खौ
conches
प्रदध्मतुः
blew.No
खोजेंसभी अध्यायहनुमान चालीसापवित्र ग्रंथपवित्र प्रार्थनाएँलेख

अध्याय 1 से और

सभी श्लोक देखें →
1.1।।1.1।।धृतराष्ट्र ने कहा -- हे संजय ! धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में एकत्र हुए युद्ध के इच्छुक (युयुत्सव:) मेरे और पाण्डु के पुत्रों ने क्या किया?1.2।।1.2।।संजय ने कहा -- पाण्डव-सैन्य की व्यूह रचना देखकर राजा दुर्योधन ने आचार्य द्रोण के पास जाकर ये वचन कहे।1.3।।1.3।।हे आचार्य ! आपके बुद्धिमान शिष्य द्रुपदपुत्र (धृष्टद्द्युम्न) द्वारा व्यूहाकार खड़ी की गयी पाण्डु पुत्रों की इस महती सेना को देखिये।1.4।।1.4।।इस सेना में महान् धनुर्धारी शूर योद्धा है ,  जो युद्ध में भीम और अर्जुन के समान हैं , जैसे --  युयुधान, विराट तथा महारथी राजा द्रुपद।1.5।।1.5।।धृष्टकेतु, चेकितान, बलवान काशिराज,  पुरुजित्, कुन्तिभोज और मनुष्यों में श्रेष्ठ शैब्य।1.6।।1.6।।पराक्रमी युधामन्यु,  बलवान् उत्तमौजा,  सुभद्रापुत्र (अभिमन्यु) और द्रोपदी के पुत्र -- ये सब महारथी हैं।1.7।।1.7।।हे द्विजोत्तम ! हमारे पक्ष में भी जो विशिष्ट योद्धागण हैं , उनको आप जान लीजिये; आपकी जानकारी के लिये अपनी सेना के नायकों के नाम मैं आपको बताता हूँ।1.8।।1.8।।एक तो स्वयं आप, भीष्म, कर्ण, और युद्ध विजयी कृपाचार्य तथा अश्वत्थामा, विकर्ण और सोमदत्त का पुत्र है।1.9।।1.9।।मेरे लिए प्राण त्याग करने के लिए तैयार, अनेक प्रकार के शस्त्रास्त्रों से सुसज्जित तथा युद्ध में कुशल और भी अनेक शूर वीर हैं।1.10।।1.10।।भीष्म के द्वारा हमारी रक्षित सेना अपर्याप्त है; किन्तु भीम द्वारा रक्षित उनकी सेना पर्याप्त है अथवा, भीष्म के द्वारा रक्षित हमारी सेना अपरिमित है किन्तु भीम के द्वारा रक्षित उनकी सेना परिमित ही है।