Adiyogi Arts
ServicesResearchBlogVideosGitaPrayersEnter App
Gita / Chapter 8.15
← PrevNext →
Sanskrit
Hindi
Sanskrit

मामुपेत्य पुनर्जन्म दुःखालयमशाश्वतम् | नाप्नुवन्ति महात्मानः संसिद्धिं परमां गताः

Transliteration

māmupetya punarjanma duḥkhālayamaśāśvatam . nāpnuvanti mahātmānaḥ saṃsiddhiṃ paramāṃ gatāḥ

English

As a result of reaching Me, the exalted ones who have attained the highest perfection do not get rirth which is an abode of sorrows and which is impermanent.

Hindi

परम सिद्धि को प्राप्त हुये महात्माजन मुझे प्राप्त कर अनित्य दुःख के आलयरूप (गृहरूप) पुनर्जन्म को नहीं प्राप्त होते हैं।।

Sanskrit
English
माम्
to Me
उपेत्य
having attained
पुनर्जन्म
rirth
दुःखालयम्
the place of pain
अशाश्वतम्
noneternal
न
not
आप्नुवन्ति
get
महात्मानः
Mahatmas or the great souls
संसिद्धिम्
to perfection
परमाम्
highest
गताः
having reached.
Hindi

आत्मानुभूति के द्वारा ज्ञानी पुरुष को प्राप्त लाभ का मूल्यांकन करते हुए यहाँ कहा गया है कि मुझे प्राप्त कर महात्मा जन पुनर्जन्म को नहीं प्राप्त होते। तत्त्व चिन्तक दार्शनिकों के अनुसार समस्त दुःखों का मूल है पुनर्जन्म। श्रीकृष्ण भी यहाँ पुनर्जन्म को दुःखालय और अशाश्वत कहते हैं।भारतीय दर्शन के इतिहास में एक बात ध्यान देने योग्य है कि प्रारम्भ में अमृतत्त्व को जीवन का लक्ष्य माना जाता था परन्तु बाद में पुनर्जन्म के अभाव को लक्ष्य स्वीकार किया गया। मनुष्य को सब अनुभवों में मृत्यु का अनुभव