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Gita / Chapter 7.3
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये | यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्त्वतः

Transliteration

manuṣyāṇāṃ sahasreṣu kaścidyatati siddhaye . yatatāmapi siddhānāṃ kaścinmāṃ vetti tattvataḥ

English

Among thousands of men a rare one endeavours for perfection. Even of the perfected ones who are diligent, one perchance knows Me in truth.

Hindi

सहस्रों मनुष्यों में कोई ही मनुष्य पूर्णत्व की सिद्धि के लिए प्रयत्न करता है और उन प्रयत्नशील साधकों में भी कोई ही पुरुष मुझे तत्त्व से जानता है।।

Sanskrit
English
मनुष्याणाम्
of men
सहस्रेषु
among thousands
कश्चित्
some one
यतति
strives
सिद्धये
for perfection
यतताम्
of the striving ones
अपि
even
सिद्धानाम्
of the successful ones
कश्चित्
some one
माम्
Me
वेत्ति
knows
तत्त्वतः
in essence.
Hindi

भारतीय आध्यात्मिक साहित्य में भिन्नभिन्न आचार्यों ने विभिन्न प्रकार से बारम्बार इस विचार को दोहराया है कि आत्मज्ञान तथा उसका अपरोक्ष अनुभव प्राप्त करने वाले साधक विरले ही होते हैं। इसके पूर्व भी हमें यह बताया गया था कि वेदान्त के सिद्धांतों को भी एक आश्चर्य के समान सुना तथा समझा जाता है। उपनिषदों में भी इसीतथ्य का ऋषियों ने वर्णन किया है।यहाँ भगवान् श्रीकृष्ण के अनुसार आत्मज्ञान की प्राप्ति का उत्तरदायितत्व साधक पर ही निर्भर है। यदि कोई साधक इस अनुभव को प्राप्त नहीं कर पाता है तो उसका एक