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Gita / Chapter 5.11
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

कायेन मनसा बुद्ध्या केवलैरिन्द्रियैरपि | योगिनः कर्म कुर्वन्ति सङ्गं त्यक्त्वात्मशुद्धये

Transliteration

kāyena manasā buddhyā kevalairindriyairapi . yoginaḥ karma kurvanti saṅgaṃ tyaktvātmaśuddhaye

English

By giving up attachment, the yogis undertake work merely through the body, mind, intellect and even the organs, for the purification of themselves.

Hindi

योगीजन, शरीर, मन, बुद्धि और इन्द्रियों द्वारा आसक्ति को त्याग कर आत्मशुद्धि (चित्तशुद्धि) के लिए कर्म करते हैं।।

Sanskrit
English
कायेन
by the body
मनसा
by the mind
बुद्ध्या
by the intellect
केवलैः
only
इन्द्रियैः
by the senses
अपि
also
योगिनः
Yogis
कर्म
action
कुर्वन्ति
perform
सङ्गम्
attachment
त्यक्त्वा
having abandoned
आत्मशुद्धये
for the purification of the self.
Hindi

कर्मयोगी का प्रयत्न यह होता है कि अपने स्वरूप में ही रहकर स्वयं के अन्तर्बाह्य घटित हो रही घटनाओं को उनके साथ तादात्म्य किये बिना केवल साक्षी भाव से देखे। कुछ काल तक इसका अभ्यास करने पर उसे यह स्पष्टतया ज्ञात होगा कि समस्त कर्म उपाधियों के द्वारा किये जाते हैं और साक्षी के साथ उनका कोई सम्बन्ध नहीं होता। तथापि उसको इस बात का ध्यान रखना चाहिये कि यह साक्षित्व अथवा साक्षी स्वयं पारमार्थिक सत्य नहीं है वरन् बुद्धि की खिड़की में से झांकता हुआ परम सत्य यह साक्षी है। हमारा अनुभव है कि हम स्वय