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Gita / Chapter 3.25
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

सक्ताः कर्मण्यविद्वांसो यथा कुर्वन्ति भारत | कुर्याद्विद्वांस्तथासक्तश्चिकीर्षुर्लोकसंग्रहम्

Transliteration

saktāḥ karmaṇyavidvāṃso yathā kurvanti bhārata . kuryādvidvāṃstathāsaktaścikīrṣurlokasaṃgraham

English

O scion of the Bharata dynasty, as the unelightened poeple act with attachment to work, so should the enlightened person act, without attachment, being desirous of the prevention of people from going astray.

Hindi

हे भारत ! कर्म में आसक्त हुए अज्ञानीजन जैसे कर्म करते हैं वैसे ही विद्वान् पुरुष अनासक्त होकर, लोकसंग्रह (लोक कल्याण) की इच्छा से कर्म करे।।

Sanskrit
English
सक्ताः
attached
कर्मणि
to action
अविद्वांसः
the ignorant
यथा
as
कुर्वन्ति
act
भारत
O Bharata
कुर्यात्
should act
विद्वान्
the wise
तथा
so
असक्तः
unattached
चिकीर्षुः
wishing
लोकसंग्रहम्
the welfare of the world.
Hindi

हम सब अपनेअपने कार्यक्षेत्रों में जीवनपर्यन्त पूर्ण उत्साह एवं रुचि के साथ कर्म करते रहते हैं। एक सामान्य मनुष्य निरन्तर कर्म के दबाव अथवा तनाव में अपने आप को थकाकर क्षीण कर लेता है। शारीरिक स्वास्थ्य ऋतु परिवर्तन की पीड़ा तथा जीवन के अन्य सुखदुख की चिन्ता न करके वह निरन्तर अधिक से अधिक धनार्जन तथा उसके उपभोग के लिए प्रयत्नशील रहता है।श्रीकृष्ण कहते हैं कि आत्मज्ञानी पुरुष भी अज्ञानी के समान उत्साहपूर्वक अथक कर्म करता है। दोनों के कार्यों में एकमात्र अन्तर यह है कि अज्ञानी पुरुष कर्म फल