Adiyogi Arts
ServicesResearchBlogVideosGitaPrayersEnter App
Gita / Chapter 2.61
← PrevNext →
Sanskrit
Hindi
Sanskrit

तानि सर्वाणि संयम्य युक्त आसीत मत्परः | वशे हि यस्येन्द्रियाणि तस्य प्रज्ञा प्रतिष्ठिता

Transliteration

tāni sarvāṇi saṃyamya yukta āsīta matparaḥ . vaśe hi yasyendriyāṇi tasya prajñā pratiṣṭhitā

English

Controlling all of them, one should remain concentrated on Me as the supreme. For, the wisdom of one whose organs are under control becomes steadfast.

Hindi

उन सब इन्द्रियों को संयमित कर युक्त और मत्पर होवे। जिस पुरुष की इन्द्रियां वश में होती हैं? उसकी प्रज्ञा प्रतिष्ठित होती है।।

Sanskrit
English
तानि
them
सर्वाणि
all
संयम्य
having restrained
युक्तः
joined
आसीत
should sit
मत्परः
intent on Me
वशे
under control
हि
indeed
यस्य
whose
इन्द्रियाणि
senses
तस्य
his
प्रज्ञा
wisdom
प्रतिष्ठिता
is settled.
Hindi

अध्यात्म साम्राज्य के सम्राट आत्मा के पतन का मूल कारण ये इन्द्रियां ही हैं। अर्जुन को यहां सावधान किया गया है कि वह पूर्णत्व प्राप्ति के लिये इन्द्रियों और विषयों के अनियन्त्रित एवं उन्मुक्त विचरण के प्रति सतत सजग रहे। आधुनिक मनोविज्ञान गीता के इस उपदेश पर नाकभौं सिकोड़ेगा क्योंकि जर्मन मनोवैज्ञानिक सिगमण्ड फ्रायड के अनुसार वासनायें मनुष्य की स्वाभाविक मूल प्रवृत्ति हैं और उनके संयमित करने का अर्थ है उनका अप्राकृतिक दमन।पाश्चात्य देशों में संयम का अर्थ दमन समझा जाता है और मन के स्वास्थ्