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Gita / Chapter 2.52
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

यदा ते मोहकलिलं बुद्धिर्व्यतितरिष्यति | तदा गन्तासि निर्वेदं श्रोतव्यस्य श्रुतस्य च

Transliteration

yadā te mohakalilaṃ buddhirvyatitariṣyati . tadā gantāsi nirvedaṃ śrotavyasya śrutasya ca

English

When your mind will go beyond the turbidity of delusion, then you will acire dispassion for what has to be heard and what has been heard.

Hindi

जब तुम्हारी बुद्धि मोहरूप दलदल (कलिल) को तर जायेगी तब तुम उन सब वस्तुओं से निर्वेद (वैराग्य) को प्राप्त हो जाओगे? जो सुनने योग्य और सुनी हुई हैं।।

Sanskrit
English
यदा
when
ते
thy
मोहकलिलम्
mire of delusion
बुद्धिः
intellect
व्यतितरिष्यति
crosses beyond
तदा
then
गन्तासि
thou shalt attain
निर्वेदम्
to indifference
श्रोतव्यस्य
of what has to be heard
श्रुतस्य
what has been heard
च
and.
Hindi

मोह निवृत्ति होने पर वैराग्य प्राप्ति का आश्वासन यहाँ अर्जुन को दिया गया है। श्रोतव्य शब्द से तात्पर्य उन सभी विषयोपभोगों से है जिनका प्रत्यक्ष अनुभव नहीं किया गया है तथा श्रुत शब्द से सभी ज्ञान अनुभव सूचित किये गये हैं। यह स्वाभाविक है कि बुद्धि के शुद्ध होने पर विषयोपभोग में कोई राग नहीं रह जाता।स्वरूप से दिव्य होते हुये भी चैतन्य आत्मा मोहावरण में फँसी हुई प्रतीत होती है। इस मोह का कारण है एक अनिर्वचनीय शक्ति माया। अव्यक्त विद्युत के समान माया भी प्रत्यक्ष दृष्टिगोचर नहीं होती परन्त