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Gita / Chapter 2.28
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

अव्यक्तादीनि भूतानि व्यक्तमध्यानि भारत | अव्यक्तनिधनान्येव तत्र का परिदेवना

Transliteration

avyaktādīni bhūtāni vyaktamadhyāni bhārata . avyaktanidhanānyeva tatra kā paridevanā

English

O descendant of Bharata, all beings remain unmanifest in the beginning;; they become manifest in the middle. After death they certainly become unmanifest. What lamentation can there be with regard to them?

Hindi

हे भारत ! समस्त प्राणी जन्म से पूर्व और मृत्यु के बाद अव्यक्त अवस्था में रहते हैं और बीच में व्यक्त होते हैं। फिर उसमें चिन्ता या शोक की क्या बात है ?

Sanskrit
English
अव्यक्तादीनि
unmanifested in the beginning
भूतानि
beings
व्यक्तमध्यानि
manifested in their middle state
भारत
O Bharata
अव्यक्तनिधनानि
unmanifested again in the end
एव
also
तत्र
there
का
what
परिदेवना
grief.
Hindi

इस श्लोक से लेकर आगे के कुछ श्लोकों में संसार के सामान्य मनुष्य के दृष्टिकोण से समस्या को अर्जुन के समक्ष बड़ी सुन्दरता से प्रस्तुत किया गया है। इन दस श्लोकों में श्रीकृष्ण समस्या का स्पष्टीकरण सामान्य व्यक्ति की दृष्टि एवं बुद्धि के अनुसार प्रस्तुत करते हैं।इस भौतिक जगत् में कार्यकरण का नियम अबाधरूप से कार्य करते हुए अनुभव में आता है। कार्य की उत्पत्ति कारण से होती है। सामान्यत कार्य व्यक्त रूप में दिखाई देता है और कारण अव्यक्त रहता है। अत सृष्टिका अर्थ है वस्तुओं का अव्यक्त अवस्था से