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Gita / Chapter 2.27
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च | तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि

Transliteration

jātasya hi dhruvo mṛtyurdhruvaṃ janma mṛtasya ca . tasmādaparihārye.arthe na tvaṃ śocitumarhasi

English

For death of anyone born is certain, and of the dead (re-) birth is a certainly. Therefore you ought not to grieve over an inevitable fact.

Hindi

जन्मने वाले की मृत्यु निश्चित है और मरने वाले का जन्म निश्चित है;  इसलिए जो अटल है अपरिहार्य – है उसके विषय में तुमको शोक नहीं करना चाहिये।।

Sanskrit
English
जातस्य
of the born
हि
for
ध्रुवः
certain
मृत्युः
death
ध्रुवम्
certain
जन्म
birth
मृतस्य
of the dead
च
and
तस्मात्
therefore
अपरिहार्ये
inevritable
अर्थे
in matter
न
not
त्वम्
thou
शोचितुम्
to grieve
अर्हसि (thou)
oughtest.
Hindi

भौतिकवादी नास्तिक लोगों का मत है कि बिना किसी पूर्वापर कारण के वस्तुएँ उत्पन्न नहीं होती हैं। आस्तिक लोग देह से भिन्न जीव का अस्तित्व स्वीकार करते हुए कहते हैं कि एक ही जीव विकास की दृष्टि से अनेक शरीर धारण करता है जिससे वह इस दृश्य जगत् के पीछे जो परम सत्य है उनको पहचान सकें। दोनों ही प्रकार के विचारों में एक सामान्य बात यह है कि दोनों ही यह मानते हैं कि जीवन जीवनमृत्यु की एक शृंखला है।इस प्रकार जीवन के स्वरूप को समझ लेने पर निरन्तर होने वाले जन्म और मृत्यु पर किसी विवेकी पुरुष को शोक