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Gita / Chapter 2.12
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपाः | न चैव न भविष्यामः सर्वे वयमतः परम्

Transliteration

na tvevāhaṃ jātu nāsaṃ na tvaṃ neme janādhipāḥ . na caiva na bhaviṣyāmaḥ sarve vayamataḥ param

English

But certainly (it is) not (a fact) that I did not exist at any time; nor you, nor these rulers of men. And surely it is not that we all shall cease to exist after this.

Hindi

वास्तव में न तो ऐसा ही है कि मैं किसी काल में नहीं था अथवा तुम नहीं थे अथवा ये राजालोग नहीं थे और न ऐसा ही है कि इससे आगे हम सब नहीं रहेंगे।।

Sanskrit
English
न
not
तु
indeed
एव
also
अहम्
I
जातु
at any time
न
not
आसम्
was
न
not
त्वम्
thou
न
not
इमे
these
जनाधिपाः
rulers of men
न
not
च
and
एव
also
न
not
भविष्यामः
shall be
सर्वे
all
वयम्
we
अतः
from this time
परम्
after.
Hindi

यहाँ भगवान् स्पष्ट घोषणा करते हैं कि देह को धारण करने वाली आत्मा एक महान तीर्थयात्रा के लिये निकल पड़ी है जो इस यात्रा के मध्य कुछ काल के लिये विभिन्न शरीरों को ग्रहण करते हुये उनके साथ तादात्म्य कर विशेष अनुभवों को प्राप्त करती है। श्रीकृष्ण अर्जुन और अन्य राजाओं का उन विशेष शरीरों में होना कोई आकस्मिक घटना नहीं थी। न वे शून्य से आये और न ही मृत्यु के बाद शून्य रूप हो जायेंगे। प्रामाणिक तात्त्विक विचार के द्वारा मनुष्य भूत वर्तमान और भविष्य की घटनाओं की सतत शृंखला समझ सकता है। आत्मा वह