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Gita / Chapter 18.54
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

ब्रह्मभूतः प्रसन्नात्मा न शोचति न काङ्क्षति | समः सर्वेषु भूतेषु मद्भक्तिं लभते पराम्

Transliteration

brahmabhūtaḥ prasannātmā na śocati na kāṅkṣati . samaḥ sarveṣu bhūteṣu madbhaktiṃ labhate parām

English

One who has become Brahman and has attained the blissful Self does not grieve or desire. Becoming the same towards all beings, he attains supreme devotion to Me.

Hindi

ब्रह्मभूत (जो साधक ब्रह्म बन गया है), प्रसन्न मन वाला पुरुष न इच्छा करता है और न शोक, समस्त भूतों के प्रति सम होकर वह मेरी परा भक्ति को प्राप्त करता है।।

Sanskrit
English
ब्रह्मभूतः
having become Brahman
प्रसन्नात्मा
sereneminded
न
not
शोचति (he)
grieves
न
not
काङ्क्षति
desires
समः
the same
सर्वेषु
all
भूतेषु
in beings
मद्भक्तिम्
devotion unto Me
लभते
obtains
पराम्
supreme.
Hindi

अहंकार और उसकी विभिन्न अभिव्यक्तियों के परित्याग से साधक का मन शान्त हो जाता है। प्राय मन के असंयमित होने तथा जीवन के त्रुटिपूर्ण मूल्यांकन के कारण ही अन्तकरण में विक्षेप और संभ्रम उत्पन्न होते हैं। उनकी निवृत्ति से मन आपेक्षिक शान्ति को प्राप्त करता है। प्रयत्नपूर्वक प्राप्त की गयी शान्ति स्वरूपानुभव से स्वाभाविक बन जाती है।कृत्रिम शान्ति को स्वाभाविक शान्ति में परिवर्तित करने के लिए शारीरिक प्रयत्नों की आवश्यकता नहीं होती। इसके लिए तो मन की सतत सजगता की ही अपेक्षा होती है। प्राय यह द