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Gita / Chapter 18.53
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

अहंकारं बलं दर्पं कामं क्रोधं परिग्रहम् | विमुच्य निर्ममः शान्तो ब्रह्मभूयाय कल्पते

Transliteration

ahaṃkāraṃ balaṃ darpaṃ kāmaṃ krodhaṃ parigraham . vimucya nirmamaḥ śānto brahmabhūyāya kalpate

English

(That person,) having discarded egotism, force, pride, desire, anger and superfluous possessions, free from the idea of possession, and serene, is fit for becoming Brahman.

Hindi

अहंकार, बल, दर्प, काम, क्रोध और परिग्रह को त्याग कर ममत्वभाव से रहित और शान्त पुरुष ब्रह्म प्राप्ति के योग्य बन जाता है।।

Sanskrit
English
अहङ्कारम्
egoism
बलम्
strength
दर्पम्
arrogance
कामम्
desire
क्रोधम्
anger
परिग्रहम्
covetousness
विमुच्य
having abandoned
निर्ममः
without mineness
शान्तः
peaceful
ब्रह्मभूयाय
for becoming Brahman
कल्पते (he)
is fit.
Hindi

पूर्व श्लोक में उपादेय (ग्रहण करने योग्य) गुणों का उल्लेख किया गया था। इस श्लोक में हेय? अर्थात् त्याज्य दुर्गुणों की सूची प्रस्तुत की गयी है। ध्यान की सफलता के लिए इन दुर्गुणों का परित्याग आवश्यक है।अहंकार देहेन्द्रियादि अनात्म उपाधियों को ही अपना स्वरूप समझकर उनके कर्मों में कर्तृत्वाभिमान अहंकार कहलाता है।बल कामना और आसक्ति से अभिभूत पुरुष का बल यहाँ अभिप्रेत है? स्वधर्मानुष्ठान की सार्मथ्य नहीं।दर्प अर्थात् गर्व। यह गर्व ही मनुष्य को धर्म मार्ग से भ्रष्ट कर देता है। धर्म के अतिक