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Gita / Chapter 11.9
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

सञ्जय उवाच | एवमुक्त्वा ततो राजन्महायोगेश्वरो हरिः | दर्शयामास पार्थाय परमं रूपमैश्वरम्

Transliteration

sañjaya uvāca . evamuktvā tato rājanmahāyogeśvaro hariḥ . darśayāmāsa pārthāya paramaṃ rūpamaiśvaram

English

Sanjaya said O King, having spoken thus, thereafter, Hari [Hari: destroyer of ignorance along with its conseences.] (Krsna) the great Master of Yoga, showed to the son of Prtha the supreme divine form:

Hindi

संजय ने कहा — हे राजन् ! महायोगेश्वर हरि ने इस प्रकार कहकर फिर अर्जुन के लिए परम ऐश्वर्ययुक्त रूप को दर्शाया।।

Sanskrit
English
एवम्
thus
उक्त्वा
having spoken
ततः
then
राजन्
O king
महायोगेश्वरः
the great Lord of Yoga
हरिः
Hari
दर्शयामास
showed
पार्थाय
to Arjuna
परमम्
Supreme
रूपम्
form
ऐश्वरम्
Sovereign.
Hindi

बहुमुखी प्रतिभा के धनी महर्षि व्यासजी ने साहित्य के जिस किसी पक्ष को स्पर्श किया उसे पूर्णत्व के सर्वोत्कृष्ट शिखर तक उठाये बिना नहीं छोड़ा। व्यासजी की प्रतिभा का वर्णन कौन कर सकता है उनमें अतुलनीय काव्य रचना की कल्पनातीत क्षमता? अनुपम गध शैली? विशुद्ध वर्णन? कलात्मक साहित्यिक रचना? आकृति और विचार दोनों में ही मौलिक नव निर्माण की सार्मथ्य? ये सब गुण पूर्ण मात्रा में थे। तेजस्वी दार्शनिक? पूर्ण ज्ञानी और व्यावहारिक ज्ञान में कुशल व्यासजी कभी राजभवनों में तो कभी युद्धभूमि में दिखाई देते?