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Gita / Chapter 11.8
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

न तु मां शक्यसे द्रष्टुमनेनैव स्वचक्षुषा | दिव्यं ददामि ते चक्षुः पश्य मे योगमैश्वरम्

Transliteration

na tu māṃ śakyase draṣṭumanenaiva svacakṣuṣā . divyaṃ dadāmi te cakṣuḥ paśya me yogamaiśvaram

English

But you are not able to see Me merely with this eye of yours. I grant you the supernatural eye; bhold My divine Yoga.

Hindi

परन्तु तुम अपने इन्हीं (प्राकृत) नेत्रों के द्वारा मुझे देखने में समर्थ नहीं हो; (इसलिए) मैं तुम्हें दिव्यचक्षु देता हूँ, जिससे तुम मेरे ईश्वरीय ‘योग’ को देखो।।

Sanskrit
English
न
not
तु
but
माम्
Me
शक्यसे (thou)
canst
द्रष्टुम्
to see
अनेन
with this
एव
even
स्वचक्षुषा
with own eyes
दिव्यम्
divine
ददामि (I)
give
ते (to)
thee
चक्षुः
the eye
पश्य
behold
मे
My
योगम्
Yoga
ऐश्वरम्
lordly.
Hindi

हम पहले ही वर्णन कर चुके हैं कि एक सारतत्व को उससे बनी विभिन्न वस्तुओं में देख पाना अपेक्षत सरल कार्य है? किन्तु इसके विपरीत अनेक को एक तत्त्व में देखने के लिए दर्शनशास्त्र के सम्यक् ज्ञान से सम्पन्न सूक्ष्म बुद्धि की आवश्यकता होती है। किसी कविता को पढ़ने मात्र के लिए केवल वर्णमाला का ज्ञान होना आवश्यक है परन्तु उसके सूक्ष्म सौन्दर्य को समझने के लिए तथा उसी के समान अन्य कविताओं के साथ उसका तुलनात्मक अध्ययन करने के लिए एक ऐसे प्रवीण मन की आवश्यकता होती है? जिसने सर्वश्रेष्ठ साहित्यिक रचन