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Gita / Chapter 9.34
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु | मामेवैष्यसि युक्त्वैवमात्मानं मत्परायणः

Transliteration

manmanā bhava madbhakto madyājī māṃ namaskuru . māmevaiṣyasi yuktvaivamātmānaṃ matparāyaṇaḥ

English

Having your mind fixed on Me, be devoted to Me, sacrifice to Me, and bow down to Me. By concentrating your mind and accepting Me as the supreme Goal, you shall surely attain Me who am thus the Self.

Hindi

(तुम) मुझमें स्थिर मन वाले बनो; मेरे भक्त और मेरे पूजन करने वाले बनो; मुझे नमस्कार करो; इस प्रकार मत्परायण (अर्थात् मैं ही जिसका परम लक्ष्य हूँ ऐसे) होकर आत्मा को मुझसे युक्त करके तुम मुझे ही प्राप्त होओगे।।

Sanskrit
English
मन्मनाः
with mind filled with Me
भव
be thou
मद्भक्तः
My devotee
मद्याजी
sacrificing unto Me
माम्,unto
Me
नमस्कुरु
bow down
माम्
to Me
एव
alone
एष्यसि
thou shalt come
युक्त्वा
having united
एवम्
thus
आत्मानम्
the self
मत्परायणः
taking Me as the Supreme Goal.
Hindi

यह श्लोक सम्पूर्ण अध्याय का सुन्दर सारांश है? क्योंकि इस अध्याय के कई अन्य श्लोकों पर यह काफी प्रकाश डालता है। हम कह सकते हैं कि यह श्लोक अनेक श्लोकों की व्याख्या का कार्य करता है।वेदान्त के प्रकरण ग्रन्थों में आत्मविकास एवं आत्मसाक्षात्कार के लिए सम्यक् ज्ञान और ध्यान का उपदेश दिया गया है। ध्यान के स्वरूप की परिभाषा इस प्रकार दी गई है कि? उस (सत्य) का ही चिन्तन? उसके विषय में ही कथन? परस्पर उसकी चर्चा करके मन का तत्पर या तत्स्वरूप बन जाने को ही? ज्ञानी पुरुष ब्रह्माभ्यास समझते हैं। ब्र