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Gita / Chapter 9.30
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

अपि चेत्सुदुराचारो भजते मामनन्यभाक् | साधुरेव स मन्तव्यः सम्यग्व्यवसितो हि सः

Transliteration

api cetsudurācāro bhajate māmananyabhāk . sādhureva sa mantavyaḥ samyagvyavasito hi saḥ

English

Even if a man of very bad conduct worships Me with one-pointed devotion, he is to be considered verily good; for he has resolved rightly.

Hindi

यदि कोई अतिशय दुराचारी भी अनन्यभाव से मेरा भक्त होकर मुझे भजता है, वह साधु ही मानने योग्य है, क्योंकि वह यथार्थ निश्चय वाला है।।

Sanskrit
English
अपि
even
चेत्
if
सुदुराचारः
a very wicked person
भजते
worships
माम्
Me
अनन्यभाक्
with devotion to none else
साधुः
righteous
एव
verily
सः
he
मन्तव्यः
should be regarded
सम्यक्
rightly
व्यवसितः
resolved
हि
indeed
सः
he.
Hindi

जिस विशेष अर्थ में भक्ति शब्द गीता में प्रयुक्त है उसकी यहाँ गौरवमयी प्रशंसा की गई है। भक्ति में प्रत्येक साधक पर होने वाले प्रभाव को दर्शाकर भक्ति का माहात्म्य यहाँ बताया गया है। गीता में वर्णित भक्ति का अर्थ है एकाग्रचित्त से अद्वैत स्वरूप ब्रह्म का आत्मरूप से अर्थात् एकत्वभाव से ध्यान करना। इस भक्ति साधना का अभ्यास दीर्घ काल तक आवश्यक तीव्रता और लगन से करने पर साधक के होने वाले विकास का क्रम यहाँ दर्शाया गया है।साधारणत? लोगों के मन में कुछ ऐसी धारणा बन गई है कि एक दुष्ट पापी या हतोत्