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Gita / Chapter 9.15
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

ज्ञानयज्ञेन चाप्यन्ये यजन्तो मामुपासते | एकत्वेन पृथक्त्वेन बहुधा विश्वतोमुखम्

Transliteration

jñānayajñena cāpyanye yajanto māmupāsate . ekatvena pṛthaktvena bahudhā viśvatomukham

English

Others verily worship Me by adoring exclusively through the sacrifice of the knowledge of oneness; (others worship Me) multifariously, and (others) as the multiformed existing variously.

Hindi

कोई मुझे ज्ञानयज्ञ के द्वारा पूजन करते हुए एकत्वभाव से उपासते हैं, कोई पृथक भाव से, कोई बहुत प्रकार से मुझ विराट स्वरूप (विश्वतो मुखम्) को उपासते हैं।।

Sanskrit
English
ज्ञानयज्ञेन
with the wisdomsacrifice
च
and
अपि
also
अन्ये
others
यजन्तः
sacrificing
माम्
Me
,उपासते
worhsip
एकत्वेन
as one
पृथक्त्वेन
as different
बहुधा
in various ways
विश्वतोमुखम्
the Allfaced.
Hindi

ज्ञानयज्ञ में कोई कर्मकाण्ड नहीं होता। इस यज्ञ में यजमान साधक का यह सतत प्रयत्न होता है कि दृश्यमान विविध नामरूपों में एकमेव चैतन्य स्वरूप आत्मा की अभिव्यक्ति और चेतनता को वह देखे और अनुभव करे। यह साधना वे साधक ही कर सकते हैं? जिन्होंने वेदान्त के इस प्रतिपादन को समझा है कि अव्यय आत्मा सर्वत्र व्याप्त है और अपने सत्स्वरूप में इस दृश्यमान विविधता तथा उनकी परस्पर वैचित्र्यपूर्ण क्रियायों को धारण किये हुये है।विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों द्वारा निर्मित चॉकलेटों के आकार? रंग? स्वाद? मूल्