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Gita / Chapter 9.13
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

महात्मानस्तु मां पार्थ दैवीं प्रकृतिमाश्रिताः | भजन्त्यनन्यमनसो ज्ञात्वा भूतादिमव्ययम्

Transliteration

mahātmānastu māṃ pārtha daivīṃ prakṛtimāśritāḥ . bhajantyananyamanaso jñātvā bhūtādimavyayam

English

O son of Prtha, the noble ones, being possessed of divine nature, surely adore Me with single-mindedness, knowing Me as the immutable source of all objects.

Hindi

हे पार्थ ! परन्तु दैवी प्रकृति के आश्रित महात्मा पुरुष मुझे समस्त भूतों का आदिकारण और अव्ययस्वरूप जानकर अनन्यमन से युक्त होकर मुझे भजते हैं।।

Sanskrit
English
महात्मानः
great souls
तु
but
माम्
Me
पार्थ
O Partha
दैवीम्
divine
प्रकृतिम्
nature
आश्रिताः
refuged (in)
भजन्ति
worship
अनन्यमनसः
with a mind devoted to nothing else
ज्ञात्वा
having known
भूतादिम्
the source of beings
अव्ययम्
imperishable.
Hindi

किसी तर्क को समझाने के लिए प्राय भगवान् श्रीकृष्ण दो परस्पर विरोधी तथ्यों को एक स्थान पर ही बताने की शैली अपनाते हैं? जिससे एक दूसरे की पृष्ठभूमि में दोनों का स्पष्ट ज्ञान हो सके। प्रथम श्लोक में उन मोहित पुरुषों का वर्णन है? जो अपनी निम्न स्तर की प्रवृत्तियों का अनुकरण करते हैं। दूसरे श्लोक में उन महात्मा पुरुषों का चित्रण किया गया है? जो समस्त दिव्य गुणों से सम्पन्न होते हैं। झूठी आशाओं से मोहित होकर उनकी पूर्ति के लिए व्यर्थ के निकृष्ट कर्मों से थके हुए मूढ़ लोग विचार करने में सर्वथा