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Gita / Chapter 7.12
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

ये चैव सात्त्विका भावा राजसास्तामसाश्च ये | मत्त एवेति तान्विद्धि न त्वहं तेषु ते मयि

Transliteration

ye caiva sāttvikā bhāvā rājasāstāmasāśca ye . matta eveti tānviddhi na tvahaṃ teṣu te mayi

English

Those things that indeed are made of (the ality of ) sattva, and those things that are made of (the ality of) rajas and tamas, know them to have sprung from Me alone. However, I am not in them; they are in Me!

Hindi

जो भी सात्त्विक (शुद्ध), राजसिक (क्रियाशील) और तामसिक (जड़) भाव हैं, उन सबको तुम मेरे से उत्पन्न हुए जानो; तथापि मैं उनमें नहीं हूँ, वे मुझमें हैं।।

Sanskrit
English
ये
whatever
च
and
एव
even
सात्त्विकाः
pure
भावाः
natures
राजसाः
active
तामसाः
inert
च
and
ये
whatever
मत्तः
from Me
एव
even
इति
thus
तान्
them
विद्धि
know
न
not
तु
indeed
अहम्
I
तेषु
in them
ते
they
मयि
in Me.
Hindi

मुझमें सम्पूर्ण जगत् पिरोया हुआ है जैसे सूत्र में मणियाँ अपने इस कथन के साथ प्रारम्भ किये गये प्रकरण का उपसंहार भगवान् श्रीकृष्ण इस श्लोक में करते हैं।हमें जगत् में ज्ञान क्रिया और जड़त्व इन तीनों का अनुभव होता है। इन्हें ही क्रमश सत्त्व रज और तमोगुण का कार्य कहा जाता है। वेदान्त में जिसे माया कहा गया है वह इन तीनों गुणों का संयुक्त रूप है जिसके अधीन प्राणियों की प्रवृत्तियाँ भिन्नभिन्न प्रकार की दिखाई देती हैं। मनुष्य की भावनाएं और विचार इन गुणों से प्रभावित होते हैं जिनके अनुसार ही म