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Gita / Chapter 5.23
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

शक्नोतीहैव यः सोढुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् | कामक्रोधोद्भवं वेगं स युक्तः स सुखी नरः

Transliteration

śaknotīhaiva yaḥ soḍhuṃ prākśarīravimokṣaṇāt . kāmakrodhodbhavaṃ vegaṃ sa yuktaḥ sa sukhī naraḥ

English

One who can withstand here itself-before departing from the body-the impulse arising from desire and anger, that man is a yogi; he is happy.

Hindi

जो मनुष्य इसी लोक में शरीर त्यागने के पूर्व ही काम और क्रोध से उत्पन्न हुए वेग को सहन करने में समर्थ है,  वह योगी (युक्त) और सुखी मनुष्य है।।

Sanskrit
English
शक्नोति
is able
इह
here (in this world)
एव
even
यः
who
सोढुम्
to withstand
प्राक्
before
शरीरविमोक्षणात्
liberation from the body
कामक्रोधोद्भवम्
born out of desire and anger
वेगम्
the impulse
सः
he
युक्तः
united
सः
he
सुखी
happy
नरः
man.
Hindi

भगवान् स्वयं अनुभव करते हैं कि उनके द्वारा ज्ञानी पुरुष का कुछ अत्यधिक उत्साह से किया हुआ वर्णन साधकों को असम्भव सा प्रतीत हो सकता है। कारण यह है कि मनुष्य़ का वर्तमान जीवन इतना अधिक दुखपूर्ण और परावलम्बी है कि साधारण मनुष्य पूर्ण आनन्द के जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकता। यदि कोई दर्शन ऐसा आदर्शवादी है जिसका हमारे व्यवहारिक जगत् से कोई सम्बन्ध ही न हो तो वह केवल एक मनोरंजक कल्पना तो हो सकता है परन्तु मनुष्य को श्रेष्ठतर बनाने की सार्मथ्य उसमें नहीं होगी।ऐसी त्रुटिपूर्ण धारणा को दूर करने क