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Gita / Chapter 5.13
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

सर्वकर्माणि मनसा संन्यस्यास्ते सुखं वशी | नवद्वारे पुरे देही नैव कुर्वन्न कारयन्

Transliteration

sarvakarmāṇi manasā saṃnyasyāste sukhaṃ vaśī . navadvāre pure dehī naiva kurvanna kārayan

English

The embodied man of self-control, having given up all actions mentally, continues happily in the town of nine gates, without doing or causing (others) to do anything at all.

Hindi

सब कर्मों का मन से संन्यास करके संयमी पुरुष नवद्वार वाली शरीर रूप नगरी में सुख से रहता हुआ न कर्म करता है और न करवाता है।।

Sanskrit
English
सर्वकर्माणि
all actions
मनसा
by the mind
संन्यस्य
having renounced
आस्ते
rests
सुखम्
happily
वशी
the selfcontrolled
नवद्वारे
in the ninegated
पुरे
in the city
देही
the embodied
न
not
एव
even
कुर्वन्
acting
न
not
कारयन्
causing to act.
Hindi

जगत् से पलायन करना संन्यास नहीं है। मिथ्या धारणाओं एवं अविवेकपूर्ण आसक्तियों का त्याग ही वास्तविक संन्यास है। जिस पुरुष की सम्पूर्ण इन्द्रियाँ एवं मन की प्रवृत्तियाँ स्वयं के वश में हैं और जिसके कर्म अहंकार और स्वार्थ से रहित होते हैं उसे ही अनिर्वचनीय आनन्द परम संतोष प्राप्त होता है। तब वह सुखपूर्वक शरीर रूपी नवद्वार नगरी में निवास करता है।नवद्वारयुक्त नगरी का रूपक उपनिषदों में प्रसिद्ध है। शरीर को उस नगरी के समान माना गया है जो प्राचीन काल में किलों की प्राचीर के अन्दर बसायी गयी होता