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Gita / Chapter 4.6
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

अजोऽपि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्वरोऽपि सन् | प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय सम्भवाम्यात्ममायया

Transliteration

ajo.api sannavyayātmā bhūtānāmīśvaro.api san . prakṛtiṃ svāmadhiṣṭhāya sambhavāmyātmamāyayā

English

Though I am birthless, undecaying by nature, and the Lord of beings, (still) by subjugating My Prakriti, I take birth by means of My own Maya.

Hindi

यद्यपि मैं अजन्मा और अविनाशी स्वरूप हूँ और भूतमात्र का ईश्वर हूँ (तथापि) अपनी प्रकृति को अपने अधीन रखकर (अधिष्ठाय) मैं अपनी माया से जन्म लेता हूँ।।

Sanskrit
English
अजः
unborn
अपि
also
सन्
being
अव्ययात्मा
of imperishable nature
भूतानाम्
of beings
ईश्वरः
the Lord
अपि
also
सन्
being
प्रकृतिम्
Nature
स्वाम्
My own
अधिष्ठाय
governing
संभवामि
come into being
आत्ममायया
by My own Maya.
Hindi

परमेश्वर अपनी निर्बाध स्वतन्त्रता और पूर्ण स्वेच्छा से एक विशिष्ट देह को धारण करके जगत् में उस काल की मोहित पीढी का मार्गदर्शन करने आते हैं। अज्ञानी के समान देहादि के बन्धन में रहना उनके लिये वास्तविकता न होकर एक नाटक की भूमिका के समान है। र्मत्य जीव अविद्या का शिकार बनता है जबकि ईश्वर स्वमाया के स्वामी बने रहते हैं। कार का चालक कार से बंधा रहता है और उसका स्वामी स्वतन्त्र। वाहन का स्वामी अपने प्रयोजन के लिये वाहन का उपयोग करता है और गन्तव्य स्थान पर पहुँचने पर उसे छोड़कर अपने कार्य में