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Gita / Chapter 4.18
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

कर्मण्यकर्म यः पश्येदकर्मणि च कर्म यः | स बुद्धिमान्मनुष्येषु स युक्तः कृत्स्नकर्मकृत्

Transliteration

karmaṇyakarma yaḥ paśyedakarmaṇi ca karma yaḥ . sa buddhimānmanuṣyeṣu sa yuktaḥ kṛtsnakarmakṛt

English

He who finds inaction in action, and action in inaction, he is the wise one [Possessed of the knowledge of Brahman] among men; he is engaged in yoga and is a performer of all actions!

Hindi

जो पुरुष कर्म में अकर्म और अकर्म में कर्म देखता है,  वह मनुष्यों में बुद्धिमान है,  वह योगी सम्पूर्ण कर्मों को करने वाला है।।

Sanskrit
English
कर्मणि
in action
अकर्म
inaction
यः
who
पश्येत्
would see
अकर्मणि
in inaction
च
and
कर्म
action
यः
who
सः
he
बुद्धिमान्
wise
मनुष्येषु
among men
सः
he
युक्तः
Yogi
कृत्स्नकर्मकृत्
performer of all actions.
Hindi

वेदान्त के वर्णनानुसार दीर्घकाल तक जब मनुष्य कर्तव्य कर्मों का पालन करता है तब सभी सच्चे साधकों के मन में एक प्रश्न उठता है कि उन्हें कैसे ज्ञात हो कि उन्होंने पूर्णत्व की स्थिति प्राप्त कर ली है। इस श्लोक में श्रीकृष्ण उस स्थिति का वर्णन कर रहे हैं।शारीरिक कर्म बुद्धि में स्थित किसी ज्ञात अथवा अज्ञात इच्छा की केवल स्थूल अभिव्यक्ति है। पूर्ण नैर्ष्कम्य की स्थिति का अर्थ निष्कामत्व की स्थिति होनी चाहिए इसे ही पूर्ण ईश्वरत्व की स्थिति कहते हैं। परन्तु यहाँ बताया हुआ लक्ष्य अनन्तस्वरूप पूर