Adiyogi Arts
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Gita / Chapter 3.7
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

यस्त्विन्द्रियाणि मनसा नियम्यारभतेऽर्जुन | कर्मेन्द्रियैः कर्मयोगमसक्तः स विशिष्यते

Transliteration

yastvindriyāṇi manasā niyamyārabhate.arjuna . karmendriyaiḥ karmayogamasaktaḥ sa viśiṣyate

English

But, O Arjuna, one who engages in Karma-yoga with the organs of action, controlling the organs with the mind and becoming unattached-that one excels.

Hindi

परन्तु हे अर्जुन जो पुरुष मन से इन्द्रियों को वश में करके अनासक्त हुआ कर्मेंन्द्रियों से कर्मयोग का आचरण करता है वह श्रेष्ठ है।।

Sanskrit
English
यः
whose
तु
but
इन्द्रियाणि
the senses
मनसा
by the mind
नियम्य
controlling
आरभते
commences
अर्जुन
O Arjuna
कर्मेन्द्रियैः
by the organs of action
कर्मयोगम्
Karma Yoga
असक्तः
unattached
सः
he
विशिष्यते
excels.
Hindi

सरलसी प्रतीत होने वाली इन दो पंक्तियों में सही कर्म एवं जीवन जीने की कला का सम्पूर्ण ज्ञान सन्निहित है। आधुनिक जगत् को विचारों की सूत्ररूपता (अर्थात् कम शब्दों में अधिक अर्थ बताना) का ज्ञान नहीं है जबकि प्राचीन सूत्रकारों ने अपने विचारों से ऐसे भारत का निर्माण किया जहाँ आध्यात्मिक संस्कृति विकसित हुई और राष्ट्र ने स्वर्णयुग का अवलोकन किया।मन का अस्तित्व एवं पोषण पाँच ज्ञानेन्द्रियों द्वारा ग्रहण की हुई बाह्य जगत् की विषय संवेदनाओं से होता है। मन की वृत्ति इन्द्रियों के माध्यम द्वारा विषय