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Gita / Chapter 3.31
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

ये मे मतमिदं नित्यमनुतिष्ठन्ति मानवाः | श्रद्धावन्तोऽनसूयन्तो मुच्यन्ते तेऽपि कर्मभिः

Transliteration

ye me matamidaṃ nityamanutiṣṭhanti mānavāḥ . śraddhāvanto.anasūyanto mucyante te.api karmabhiḥ

English

Those men who ever follow this teaching of Mine with faith and without cavil, they also become freed from actions.

Hindi

जो मनुष्य दोष बुद्धि से रहित (अनसूयन्त:) और श्रद्धा से युक्त हुए सदा मेरे इस मत (उपदेश) का अनुष्ठानपूर्वक पालन करते हैं, वे कर्मों से (बन्धन से) मुक्त हो जाते हैं।।

Sanskrit
English
ये
those who
मे
My
मतम्
teaching
इदम्
this
नित्यम्
constantly
अनुतिष्ठन्ति
practise
मानवाः
men
श्रद्धावन्तः
full of faith
अनसूयन्तः
not cavilling
मुच्यन्ते
are freed
ते
they
अपि
also
कर्मभिः
from actions.
Hindi

कर्मयोग के सिद्धान्त का मात्र ज्ञान होने से नहीं किन्तु उसके अनुसार आचरण करने पर ही वह हमारा कल्याण कर सकेगा। यह श्रीकृष्ण का मत है। अध्यात्म ज्ञान तो एक ही है परन्तु आचार्यों सम्प्रदाय संस्थापकों एवं भिन्नभिन्न धर्म प्रथाओं के मतों में अनेक भेद हैं जिसका कारण यह है कि वे सभी तत्कालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अपनी पीढ़ी का मार्ग दर्शन करना चाहते थे जिससे सभी साधक परम पुरुषार्थ को प्राप्त कर सकें।बैलगाड़ी हांकने वाले चालक के चाबुक के नीचे काम करने वाले पशु के समान ही मनुष्य को बोझ