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Gita / Chapter 18.74
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

सञ्जय उवाच | इत्यहं वासुदेवस्य पार्थस्य च महात्मनः | संवादमिममश्रौषमद्भुतं रोमहर्षणम्

Transliteration

sañjaya uvāca . ityahaṃ vāsudevasya pārthasya ca mahātmanaḥ . saṃvādamimamaśrauṣamadbhutaṃ romaharṣaṇam

English

Sanjaya said I thus heard this conversation of Vasudeva and of the great-souled Partha, which is unie and makes one’s hair stand on end.

Hindi

संजय ने कहा — इस प्रकार मैंने भगवान् वासुदेव और महात्मा अर्जुन के इस अद्भुत और रोमान्चक संवाद का वर्णन किया।।

Sanskrit
English
इति
thus
अहम्
I
वासुदेवस्य
of Krishna
पार्थस्य
of Arjuna
च
and
महात्मनः
highsouled
संवादम्
dialogue
इमम्
this
अश्रौषम् (I)
have heard
अद्भुतम्
wonderful
रोमहर्षणम्
which causes the hair to stand on end.
Hindi

गीतोपदेश का प्रारम्भ होने के पूर्व? अर्जुन ने कहा था? मैं युद्ध नहीं करूंगा। और? उपदेश की समाप्ति पर उसने? पूर्व श्लोक में? यह घोषणा की? मैं आपके वचन का पालन करूंगा। इस प्रकार रोग का उपचार पूर्ण हुआ और उसके साथ ही गीताशास्त्र की परिसमाप्ति होती है। इस सन्दर्भ में? ईसामसीह के कथन का स्मरण होता है। प्राणदण्ड की शूली को ढोते हुए वे जा रहे थे लोगों की व्यंगोक्तियों से क्षणभर के लिये वे अर्जुन की स्थिति में पहुंच गये। परन्तु? तत्काल मोह मुक्त होकर उन्होंने घोषणा की हे प्रभु आपकी इच्छा पूर्