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Gita / Chapter 18.59
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

यदहंकारमाश्रित्य न योत्स्य इति मन्यसे | मिथ्यैष व्यवसायस्ते प्रकृतिस्त्वां नियोक्ष्यति

Transliteration

yadahaṃkāramāśritya na yotsya iti manyase . mithyaiṣa vyavasāyaste prakṛtistvāṃ niyokṣyati

English

That you think ‘I shall not fight’, by relying on egotism,-vain is this determination of yours. (Your) nature impel you!

Hindi

और अहंकारवश तुम जो यह सोच रहे हो, “मैं युद्ध नहीं करूंगा”, यह तुम्हारा निश्चय मिथ्या है, (क्योंकि) प्रकृति (तुम्हारा स्वभाव) ही तुम्हें (बलात् कर्म में) प्रवृत्त करेगी।।

Sanskrit
English
यत्
if
अहङ्कारम्
egoism
आश्रित्य
having taken refuge in
न
not
योत्स्ये (I)
will fight
इति
thus
मन्यसे (thou)
thinkest
मिथ्या
vain
एषः
this
व्यवसायः
resolve
ते
thy
प्रकृतिः
nature
त्वाम्
thee
नियोक्ष्यति
will compel.
Hindi

सत्य के सामान्य कथन की ओर मनुष्य विशेष ध्यान नहीं देता। इस कारण सत्य के उस ज्ञान को वह आत्मसात् नहीं कर पाता। परन्तु यदि उसी सामान्य कथन को मनुष्य को अपने जीवन से सम्बन्धित अनुभवों में प्रयुक्त कर दर्शाया जाये? तो वह उस ज्ञान को अर्जित कर आत्मसात् कर लेता है। वह ज्ञान उसका अपना नित्य अनुभव बन जाता है। इसलिए? भगवान् श्रीकृष्ण पूर्वोक्त दार्शनिक सिद्धांत को अर्जुन की तात्कालिक समस्या के सन्दर्भ में उसे समझाना चाहते हैं।यदि अपने अभिमान के कारण अर्जुन यह सोचता है कि वह युद्ध नहीं करेगा? तो