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Gita / Chapter 18.56
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः | मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम्

Transliteration

sarvakarmāṇyapi sadā kurvāṇo madvyapāśrayaḥ . matprasādādavāpnoti śāśvataṃ padamavyayam

English

Ever engaging even in all actions, one to whom I am the refuge, attains the eternal, immutable State through My grace.

Hindi

जो पुरुष मदाश्रित होकर सदैव समस्त कर्मों को करता है, वह मेरे प्रसाद (अनुग्रह) से शाश्वत, अव्यय पद को प्राप्त कर लेता है।।

Sanskrit
English
सर्वकर्माणि
all actions
अपि
also
सदा
always
कुर्वाणः
doing
मद्व्यपाश्रयः
taking refuge in Me
मत्प्रसादात्
by My grace
अवाप्नोति
obtains
शाश्वतम्
the eternal
पदम्
state or abode
अव्ययम्
indestructible.
Hindi

गीता का तत्त्वज्ञान अत्यन्त जीवन्त और शक्तिशाली है। सरल और सामान्य प्रतीत होने वाला? भगवान् का यह दिव्य गान मानो शक्ति के किसी विस्फोटक पदार्थ का भंडार है जिसे सम्यक् ज्ञान द्वारा विस्फोटित किया जा सकता है।इसके उपदेशानुसार जीवन जीने की उष्णता पाकर वह भण्डार फूट पड़ता है। उसके विस्फोट से एक साधक के श्रेष्ठ एवं दिव्य व्यक्तित्व की संभावनाओं पर जमी हुई अज्ञान की वे समस्त पर्तें ध्वस्त हो जाती हैं। गीता के अनुसार? केवल निष्क्रिय समर्पण अथवा कर्मकाण्ड का अनुष्ठान ही भक्ति नहीं है। कर्तृत्व