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Gita / Chapter 18.44
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

कृषिगौरक्ष्यवाणिज्यं वैश्यकर्म स्वभावजम् | परिचर्यात्मकं कर्म शूद्रस्यापि स्वभावजम्

Transliteration

kṛṣigaurakṣyavāṇijyaṃ vaiśyakarma svabhāvajam . paricaryātmakaṃ karma śūdrasyāpi svabhāvajam

English

The natural duties of the Vaisyas are agriculture, cattle-rearing and trade. Of the Sudras, too, the natural duty is in the form of service.

Hindi

कृषि, गौपालन तथा वाणिज्य – ये वैश्य के स्वाभाविक कर्म हैं, और शूद्र का स्वाभाविक कर्म है परिचर्या अर्थात् सेवा करना।।

Sanskrit
English
कृषिगौरक्ष्यवाणिज्यम्
agriculture
cattlerearing
and trade
वैश्यकर्म
the duties of Vaisya
स्वभावजम्
born of nature
परिचर्यात्मकम्
consisting of service
कर्म
action
शूद्रस्य
of the Sudra
अपि
also
स्वभावजम्
born of nature.
Hindi

प्रत्येक मनुष्य में गुणों की तारतम्यता किसी विशिष्ट अनुपात में होती है और इसलिए प्रत्येक मनुष्य का अपना विशिष्ट स्वभाव भी होता है। इसी कारण एक मनुष्य जिस कार्य विशेष को कुशलतापूर्वक कर सकता है? उसी कार्य को अन्य व्यक्ति उतनी कुशलता से नहीं कर पाता। रजोगुणी क्षत्रिय को सात्त्विक ब्राह्मण के समान ध्यानाभ्यास करना संभव नहीं होता। उसी प्रकार वैश्य और शूद्र भी क्षत्रिय के शूरवीरतापूर्ण कर्मों को नहीं कर पायेंगे। सामाजिक जीवन में सर्वोच्च प्रतिष्ठा के पद तक पहुँचने के लिए सभी मनुष्यों को पूर