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Gita / Chapter 18.24
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

यत्तु कामेप्सुना कर्म साहंकारेण वा पुनः | क्रियते बहुलायासं तद्राजसमुदाहृतम्

Transliteration

yattu kāmepsunā karma sāhaṃkāreṇa vā punaḥ . kriyate bahulāyāsaṃ tadrājasamudāhṛtam

English

But that action is said to be born of rajas which is done by one desirous of results or by one who is egotistic, and which is highly strenuous.

Hindi

और जो कर्म बहुत परिश्रम से युक्त है तथा फल की कामना वाले, अहंकारयुक्त पुरुष के द्वारा किया जाता है, वह कर्म राजस कहा गया है।।

Sanskrit
English
यत्
which
तु
but
कामेप्सुना
by one longing for desires
कर्म
action
साहङ्कारेण
with egoism
वा
or
पुनः
again
क्रियते
is performed
बहुलायासम्
with much effort
तत्
that
राजसम्
Rajasic (passionate)
उदाहृतम्
is declared.
Hindi

राजसिक कर्म मैं कर्ता हूँ की भावना से प्रेरित? अहंकार से युक्त स्वार्थ और परिश्रम से परिपूर्ण होते हैं। इनका कर्ता अत्याधित तनाव और दबाव में रहता है।इस श्लोक का अर्थ स्पष्ट है। राजनीतिक नेताओं? सामाजिक कार्यकर्ताओं? बड़ेबड़े उद्योगपतियों अत्यधिक चिन्तित पालकों? कट्टर धर्म प्रचारकों? धर्म परिवर्तन कराने वाली मिशनरियों तथा अन्धाधुन्ध धन कमाने वालों के प्राय समस्त कर्म राजस श्रेणी में ही आते हैं। कभीकभी तो वे तमोगुण के स्तर तक भी गिर जाते हैं।