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Gita / Chapter 17.7
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

आहारस्त्वपि सर्वस्य त्रिविधो भवति प्रियः | यज्ञस्तपस्तथा दानं तेषां भेदमिमं शृणु

Transliteration

āhārastvapi sarvasya trividho bhavati priyaḥ . yajñastapastathā dānaṃ teṣāṃ bhedamimaṃ śṛṇu

English

Food also, which is dear to all, is of three kinds; and so also are sacrifices, austerity and charity. Listen to this classification of them.

Hindi

(अपनीअपनी प्रकृति के अनुसार) सब का प्रिय भोजन भी तीन प्रकार का होता है? उसी प्रकार यज्ञ? तप और दान भी तीन प्रकार के होते हैं? उनके भेद को तुम मुझसे सुनो।।

Sanskrit
English
आहारः
food
तु
indeed
अपि
also
सर्वस्य
of all
त्रिविधः
threefold
भवति
is
प्रियः
dear
यज्ञः
sacrifice
तपः
austerity
तथा
also
दानम्
almsgiving
तेषाम्
their
भेदम्
distinction
इमम्
this
श्रृणु
hear.
Hindi

इस श्लोक में भगवान् श्रीकृष्ण आगे वर्णन किये जाने वाले विषय का नाम निर्देश करते हैं। मनुष्य का स्वभाव उसके कार्यकलापों में व्यक्त होता है। उसका प्रिय आहार? मित्रगण? मन की भावनाएं? जीवन विषयक दृष्टिकोण आदि उसके स्वभाव की श्रेणी को इंगित करते हैं। प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी गुण विशेष के आधिक्य से प्रभावित रहता है।मनुष्य का आन्तरिक स्वभाव तथा बाह्याचरण पर किस गुण की अधिकता से किस प्रकार का प्रभाव पड़ता है इसका विश्लेषण आगे के श्लोकों में किया गया है। यहाँ इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि इन