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Gita / Chapter 16.13
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम् | इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम्

Transliteration

idamadya mayā labdhamimaṃ prāpsye manoratham . idamastīdamapi me bhaviṣyati punardhanam

English

‘This has been gained by me today; I shall acire this desired object. This is in hand; again, this wealth also will come to me.’

Hindi

मैंने आज यह पाया है और इस मनोरथ को भी प्राप्त करूंगा, मेरे पास यह इतना धन है और इससे भी अधिक धन भविष्य में होगा।।

Sanskrit
English
इदम्
this
अद्य
today
मया
by me
लब्धम्
has been gained
इमम्
this
प्राप्स्ये (I)
shall obtain
मनोरथम्
desire
इदम्
this
अस्ति
is
इदम्
this
अपि
also
मे
to me
भविष्यति
shall be
पुनः
again
धनम्
wealth.
Hindi

यह श्लोक स्वत स्पष्ट है। सामान्य लोग इसी प्रकार का जीवन जीते हैं। प्रतिस्पर्धा से पूर्ण इस जगत् में उस व्यक्ति को सफल समझा जाता है? जिसके पास अधिकतम धन हो। अत मनुष्य को जितना अधिक धन प्राप्त होता है? उससे उसकी सन्तुष्टि नहीं होती। धनार्जन की इस धारणा में हास्यास्पद विरोधाभास यह है कि धन प्राप्ति से सन्तोष होने के स्थान पर अधिकाधिक धन की इच्छा बढ़ती जाती है। आज तक किसी भी भौतिकवादी धनी व्यक्ति ने अपने धन को पर्याप्त नहीं माना है।इसके विपरीत स्थितप्रज्ञ पुरुष के लक्षण बताते हुए गीता में