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Gita / Chapter 15.6
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

न तद्भासयते सूर्यो न शशाङ्को न पावकः | यद्गत्वा न निवर्तन्ते तद्धाम परमं मम

Transliteration

na tadbhāsayate sūryo na śaśāṅko na pāvakaḥ . yadgatvā na nivartante taddhāma paramaṃ mama

English

Neither the sun nor the moon nor fire illumines That. That is My supreme Abode, reaching which they do not return.

Hindi

उसे न सूर्य प्रकाशित कर सकता है और न चन्द्रमा और न अग्नि। जिसे प्राप्त कर मनुष्य पुन: (संसार को) नहीं लौटते हैं, वह मेरा परम धाम है।।

Sanskrit
English
न
not
तत्
that
भासयते
illumines
सूर्यः
the sun
न
not
शशाङ्कः
the moon
न
not
पावकः
fire
यत्
to which
गत्वा
having gone
न
not
निवर्तन्ते (they)
return
तत्
that
धाम
Abode
परमम्
Supreme
मम
My.
Hindi

आध्यात्मिक जीवन का लक्ष्य है संसार में अपुनरावृत्ति। इसे विशेष बल देकर पूर्व के श्लोकों में प्रतिपादित किया गया था और इस श्लोक में पुन उसे दोहराया जा रहा है। धर्मशास्त्र के सभी ग्रन्थों में किसी विशेष सिद्धान्त पर बल देने के लिये पुनरुक्ति का ही प्रयोग किया जाता है। निसंदेह इस उपाय का सर्वत्र उपयोग नहीं किया जाता है। तर्क की परिसीमा में आने वाले प्रमेयों की सिद्धि केवल तर्कों के द्वारा ही की जा सकती है। परन्तु आत्मज्ञान का क्षेत्र इन्द्रिय अगोचर होने से प्रारम्भ में केवल आचार्य का ही वह