Adiyogi Arts
ServicesResearchBlogVideosGitaPrayersEnter App
Gita / Chapter 14.7
← PrevNext →
Sanskrit
Hindi
Sanskrit

रजो रागात्मकं विद्धि तृष्णासङ्गसमुद्भवम् | तन्निबध्नाति कौन्तेय कर्मसङ्गेन देहिनम्

Transliteration

rajo rāgātmakaṃ viddhi tṛṣṇāsaṅgasamudbhavam . tannibadhnāti kaunteya karmasaṅgena dehinam

English

Know rajas to be of the nature of passion, born of hankering and attachment. O son of Kunti, that binds the embodied one through attachment to action.

Hindi

हे कौन्तेय ! रजोगुण को रागस्वरूप जानो, जिससे तृष्णा और आसक्ति उत्पन्न होती है। वह देही आत्मा को कर्मों की आसक्ति से बांधता है।।

Sanskrit
English
रजः
Rajas
रागात्मकम्
of the nature of passion
विद्धि
know
तृष्णासङ्गसमुद्भवम्
the source of thirst and attachment
तत्
that
निबध्नाति
binds
कौन्तेय
O son of Kunti (Arjuna)
कर्मसङ्गेन
by attachment to action
देहिनम्
the embodied one.
Hindi

अपने मन पर विजय प्राप्त करने के इच्छुक साधक को मन की उन समस्त सूक्ष्म प्रवृत्तियों एवं रुचियों का ज्ञान होना चाहिये? जिनके द्वारा वह बारम्बार उन्मत्त के समान विषयों की ओर भागता है। इस प्रकार? यह मन साधक के आन्तरिक व्यक्तित्व को नष्ट करने के षड्यन्त्र में ही लगा रहता है।रजोगुण को रागस्वरूप जानो जब अन्तकरण में रजोगुण के प्रभावों का घातक आक्रमण होता है तब वह मनुष्य के मन को असंख्य पीड़ादायक उद्वेगों से चूरचूर कर देता है। मन के स्तर पर उठने वाले ये उद्वेग ही रजोगुण के मुख्य लक्षण हैं। ये मन