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Gita / Chapter 14.26
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

मां च योऽव्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते | स गुणान्समतीत्यैतान्ब्रह्मभूयाय कल्पते

Transliteration

māṃ ca yo.avyabhicāreṇa bhaktiyogena sevate . sa guṇānsamatītyaitānbrahmabhūyāya kalpate

English

And he who serves Me through the unswerving Yoga of Devotion, he, having gone beyond these alities, alifies for becoming Brahman.

Hindi

जो पुरुष अव्यभिचारी भक्तियोग के द्वारा मेरी सेवा अर्थात् उपासना करता है, वह इन तीनों गुणों के अतीत होकर ब्रह्म बनने के लिये योग्य हो जाता है।।

Sanskrit
English
माम्
Me
च
and
यः
who
अव्यभिचारेण
unswerving
भक्तियोगेन
with devotion
सेवते
serves
सः
he
गुणान्
Gunas
समतीत्य
crossing beyond
एतान्
these
ब्रह्मभूयाय
for becoming Brahman
कल्पते
is fit.
Hindi

धर्म का व्यावहारिक शास्त्रीय ग्रंथ होने के कारण गीता में केवल सिद्धान्तों का प्रतिपादन नहीं किया गया है। इसमें प्रत्येक सिद्धान्त के विवेचन के पश्चात् उस साधन का वर्णन किया गया है? जिसके अभ्यास से एक साधक सिद्धावस्था को प्राप्त हो सकता है।जो अव्यभिचारी भक्तियोग से मेरी सेवा करता है ईश्वर से परम प्रीति भक्ति कहलाती है। प्रिय वस्तु में हमारा मन सहजता से रमता है। हमारा सम्पूर्ण स्वभाव हमारे विचारों से पोषित होता है। यथा विचार तथा मन? यह नियम है। इसलिये एकाग्र चित्त से आत्मा के अनन्तस्वरू