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Gita / Chapter 14.21
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

अर्जुन उवाच | कैर्लिङ्गैस्त्रीन्गुणानेतानतीतो भवति प्रभो | किमाचारः कथं चैतांस्त्रीन्गुणानतिवर्तते

Transliteration

arjuna uvāca . kairliṅgaistrīnguṇānetānatīto bhavati prabho . kimācāraḥ kathaṃ caitāṃstrīnguṇānativartate

English

Arjuna said O Lord, by what signs is one (known) who has gone beyond these three alities? What is his behaviour, and how does he transcend these three alities?

Hindi

अर्जुन ने कहा — हे प्रभो ! इन तीनो गुणों से अतीत हुआ पुरुष किन लक्षणों से युक्त होता है ? वह किस प्रकार के आचरण वाला होता है ? और, वह किस उपाय से इन तीनों गुणों से अतीत होता है।।

Sanskrit
English
कैः
by what
लिंगैः
by marks
त्रीन्
three
गुणान्
Gunas
एतान्
these
अतीतः
crossed
भवति
becomes
प्रभो
O Lord
किमाचारः
what (is his) conduct
कथम्
how
च
and
एतान्
these
त्रीन्
three
गुणान्
Gunas
अतिवर्तते
goes beyond.
Hindi

दर्शनशास्त्र के प्रारम्भिक अध्ययन के समय की अपरिहार्य कठिनाई और थकान दूर करने तथा अध्ययन को और अधिक मनोरंजन बनाने के लिये गीता की रचना संवाद शैली में की गई है। यह स्पष्ट है कि पूर्ण ज्ञानी भगवान् श्रीकृष्ण और मोहित पुरुष अर्जुन के इस संवाद में? कवि व्यास जी को तात्त्विक विवेचन के समय भी मानव स्वभाव का विस्मरण नहीं हुआ है। ज्ञानियों की किसी भी सभा में अर्जुन के प्रश्न बालसुलभ कौतूहल अथवा केवल बुद्धिचातुर्य के समान प्रतीत होंगे। तथापि जिस धैर्य के साथ भगवान् श्रीकृष्ण मध्यम बुद्धि के शिष