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Gita / Chapter 14.14
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

यदा सत्त्वे प्रवृद्धे तु प्रलयं याति देहभृत् | तदोत्तमविदां लोकानमलान्प्रतिपद्यते

Transliteration

yadā sattve pravṛddhe tu pralayaṃ yāti dehabhṛt . tadottamavidāṃ lokānamalānpratipadyate

English

When an embodied one undergoes death while sattva is exclusively prodominant, then he attains the taintless worlds of those who know the highest (entities).

Hindi

जब यह जीव (देहभृत्) सत्त्वगुण की प्रवृद्धि में मृत्यु को प्राप्त होता है, तब उत्तम कर्म करने वालों के निर्मल अर्थात् स्वर्गादि लोकों को प्राप्त होता है।।

Sanskrit
English
यदा
when
सत्त्वे
in Sattva
प्रवृद्धे
having become predominant
तु
verily
प्रलयम्
death
याति
meets
देहभृत्
the embodied one
तदा
then
उत्तमविदाम्
of the knowers of the Highest
लोकान्
to the worlds
अमलान्
of the spotless
प्रतिपद्यते (he)
attains.
Hindi

मरणोपरान्त जीव के अस्तित्व तथा उसकी गति का विषय इन्द्रिय अगोचर है। अत प्रस्तुत प्रकरण में प्रतिपादित सिद्धांत के सत्यत्त्व की पुष्टि इसी देह में रहते हुए इन्द्रियों के द्वारा नहीं हो सकती है किन्तु मनुष्य के वर्तमान जीवन के मानसिक व्यवहार का सूक्ष्म अध्ययन करने पर प्रस्तुत सिद्धांत की युक्तियुक्तता के विषय में कोई सन्देह नहीं रह जाता है। कोई चिकित्सक अकस्मात् किसी दिन स्थापत्यशास्त्र (गृह निर्माण के विज्ञान) की किसी सूक्ष्म समस्या के विषय में चिन्तन नहीं प्रारम्भ करता और न ही कोई अभियन