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Gita / Chapter 13.31
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

यदा भूतपृथग्भावमेकस्थमनुपश्यति | तत एव च विस्तारं ब्रह्म सम्पद्यते तदा

Transliteration

yadā bhūtapṛthagbhāvamekasthamanupaśyati . tata eva ca vistāraṃ brahma sampadyate tadā

English

When one realizes that the state of diversity of living things is rooted in the One, and that their manifestation is also from That, then one becomes identified with Brahman.

Hindi

यह पुरुष जब भूतों के पृथक् भावों को एक (परमात्मा) में स्थित देखता है तथा उस (परमात्मा) से ही यह विस्तार हुआ जानता है, तब वह ब्रह्म को प्राप्त होता है।।

Sanskrit
English
यदा
when
भूतपृथग्भावम्
the whole variety of beings
एकस्थम्
resting in the One
अनुपश्यति
sees
ततः
from that
एव
alone
च
and
विस्तारम्
the spreading
ब्रह्म
Brahman
सम्पद्यते (he)
becomes
तदा
then.
Hindi

किसी वस्तु या घटना के वैज्ञानिक अध्ययन की पूर्णता उसके बौद्धिक विश्लेषण तथा प्रायोगिक प्रत्यक्षीकरण से ही होती है।जब भौतिक विज्ञान में यह ज्ञात होता है कि परमाणु पदार्थ की इकाई है? तब इस ज्ञान के साथ यह भी समझना चाहिए कि ये परमाणु ही विभिन्न संख्या एवं प्रकारों में संयोजित होकर असंख्य रूप और गुणों वाली वस्तुओं के इस जगत् की रचना करते हैं। इसी प्रकार समस्त नाम और रूपों के पीछे एक आत्मतत्त्व ही सत्य है? यह जानना मात्र आंशिक ज्ञान है। ज्ञान की पूर्णता तो इसमें होगी कि जब हम यह भी जानेंगे