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Gita / Chapter 13.26
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

अन्ये त्वेवमजानन्तः श्रुत्वान्येभ्य उपासते | तेऽपि चातितरन्त्येव मृत्युं श्रुतिपरायणाः

Transliteration

anye tvevamajānantaḥ śrutvānyebhya upāsate . te.api cātitarantyeva mṛtyuṃ śrutiparāyaṇāḥ

English

Others, agian, who do not know thus, take to thinking after hearing from others; they, too, who are devoted to hearing, certainly overcome death.

Hindi

परन्तु, अन्य लोग जो स्वयं इस प्रकार न जानते हुए, दूसरों से (आचार्यों से) सुनकर ही उपासना करते हैं, वे श्रुतिपरायण (अर्थात् श्रवण ही जिनके लिए परम साधन है) लोग भी मृत्यु को नि:सन्देह तर जाते हैं।।

Sanskrit
English
अन्ये
others
तु
indeed
एवम्
thus
अजानन्तः
not knowing
श्रुत्वा
having heard
अन्येभ्यः
from others
उपासते
worship
ते
they
अपि
also
च
and
अतितरन्ति
cross beyond
एव
even
मृत्युम्
death
श्रुतिपरायणाः
regarding what they have heard as the Supreme refuge.
Hindi

उत्तम और मध्यम अधिकारियों के लिए उपयुक्त मार्गों को बताने के पश्चात् अब मन्द बुद्धि साधकों के लिए गीताचार्य एक उपाय बताते हैं।अन्यों से श्रवण कुछ ऐसे भी लोग होते हैं? जो ध्यान? सांख्य और कर्मयोग इन तीनों में से किसी एक को भी करने में असमर्थ होते हैं। उनके विकास के लिए एकमात्र उपाय यह है कि उनको किसी आचार्य से,पूजा या उपासना के विषय में श्रवण कर तदनुसार ईश्वर की आराधना करनी चाहिए।वे भी मृत्यु को तर जाते हैं जगत् में यह देखा जाता है कि जिनकी बुद्धि मन्द होती है? उनमें श्रद्धा का आधिक्य