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Gita / Chapter 13.15
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

सर्वेन्द्रियगुणाभासं सर्वेन्द्रियविवर्जितम् | असक्तं सर्वभृच्चैव निर्गुणं गुणभोक्तृ च

Transliteration

sarvendriyaguṇābhāsaṃ sarvendriyavivarjitam . asaktaṃ sarvabhṛccaiva nirguṇaṃ guṇabhoktṛ ca

English

Shining through the functions of all the organs, (yet) devoid of all the organs; unattached, and verily the supporter of all; without ality, and the perceiver of alities;

Hindi

वह समस्त इन्द्रियों के गुणो (कार्यों) के द्वारा प्रकाशित होने वाला, परन्तु (वस्तुत:) समस्त इन्द्रियों से रहित है; आसक्ति रहित तथा गुण रहित होते हुए भी सबको धारणपोषण करने वाला और गुणों का भोक्ता है।।

Sanskrit
English
सर्वेन्द्रियगुणाभासम्
shining by the functions of all senses
सर्वेन्द्रयविवर्जितम् (yet)
without the senses
असक्तम्
unattached
सर्वभृत् (yet)
supporting all
च
and
एव
even
निर्गुणम्
devoid of alities
गुणभोक्तृ (yet)
experiencer of the alities
च
and.
Hindi

अनिर्देश्य परम ब्रह्म का आत्मरूप से निर्देश करने की एक विधि यह है कि उसे विरोधाभास की भाषा में इंगित करे। एक वाक्य को सुनकर जब बुद्धि उसके विषय में कोई धारणा बना लेती है? तब दूसरा वाक्य उस धारणा का खण्डन कर देता है। इस प्रकार स्वाभाविक है कि वह बुद्धि कल्पना शून्य होकर अपने निर्विकल्प स्वरूप के अनुभव में स्थित हो जाती है। यह विरोधाभास की भाषा आध्यात्मिक ग्रन्थों की विशेषता है। परन्तु शास्त्रों का सतही अध्ययन करने वाले लोग? शास्त्रोपदेश की विधि के मर्म को न समझ कर? अपने अविश्वास या नास्