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Gita / Chapter 11.53
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

नाहं वेदैर्न तपसा न दानेन न चेज्यया | शक्य एवंविधो द्रष्टुं दृष्टवानसि मां यथा

Transliteration

nāhaṃ vedairna tapasā na dānena na cejyayā . śakya evaṃvidho draṣṭuṃ dṛṣṭavānasi māṃ yathā

English

Not through the Vedas, not by austerity, not by gifts, nor even by sacrifice can I be seen in this form as you have seen Me.

Hindi

न वेदों से, न तप से, न दान से और न यज्ञ से ही मैं इस प्रकार देखा जा सकता हूँ, जैसा कि तुमने मुझे देखा है।।

Sanskrit
English
न
not
अहम्
I
वेदैः
by the Vedas
न
not
तपसा
by austerity
न
not
दानेन
by gift
न
not
च
and
इज्यया
by sacrifice
शक्यः (am)
possible
एवंविधः
like this
द्रष्टुम्
to be seen
दृष्टवानसि (thou)
hast seen
माम्
Me
यथा
as.
Hindi

भगवान् के इस विश्वरूप का दर्शन मिलना किसी के लिए भी सुलभ नहीं है। दर्शन का यह अनुभव न वेदाध्ययन से और न तप से? न दान से और न यज्ञ से ही प्राप्त हो सकता है। यहाँ तक कि स्वर्ग के निवासी देवतागण भी अपनी विशाल बुद्धि? दीर्घ जीवन और कठिन साधना के द्वारा भी इस रूप को नहीं देख पाते और सदा उसके लिए लालायित रहते हैं। ऐसा होने पर भी भगवान् श्रीकृष्ण ने अपने इस विराट् और आश्चर्यमय रूप को अपने मित्र अर्जुन को केवल अनुग्रह करके दर्शाया जैसा कि स्वयं उन्होंने ही स्वीकार किया था।हम इस बात पर आश्चर्य़