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Gita / Chapter 10.8
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

अहं सर्वस्य प्रभवो मत्तः सर्वं प्रवर्तते | इति मत्वा भजन्ते मां बुधा भावसमन्विताः

Transliteration

ahaṃ sarvasya prabhavo mattaḥ sarvaṃ pravartate . iti matvā bhajante māṃ budhā bhāvasamanvitāḥ

English

I am the origin of all; everything moves on owing to Me. Realizing thus, the wise ones, filled with fervour, adore Me.

Hindi

मैं ही सबका प्रभव स्थान हूँ; मुझसे ही सब (जगत्) विकास को प्राप्त होता है, इस प्रकार जानकर बुधजन भक्ति भाव से युक्त होकर मुझे ही भजते हैं।।

Sanskrit
English
अहम्
I
सर्वस्य
of all
प्रभवः
the source
मत्तः
from Me
सर्वम्
everything
प्रवर्तते
evolves
इति
thus
मत्वा
understanding
भजन्ते
worship
माम्
Me
बुधाः
the wise
भावसमन्विताः
endowed with meditation.
Hindi

व्यष्टि और समष्टि में जो भेद है वह उन उपाधियों के कारण है? जिनके माध्यम से एक ही सनातन? परिपूर्ण सत्य प्रकट होता है। इन दो उपाधियों के कारण ब्रह्म को ही क्रमश जीव और ईश्वर भाव प्राप्त होते हैं जैसे एक ही विद्युत् शक्ति बल्ब और हीटर में क्रमश प्रकाश और ताप के रूप में व्यक्त होती है। स्वयं विद्युत् में न प्रकाश है और न उष्णता। इसी प्रकार स्वयं परमात्मा में न ईश्वर भाव है और न जीव भाव। जो पुरुष इसे तत्त्वत जानता है वह अविकम्प योग के द्वारा ब्रह्मनिष्ठता को प्राप्त होता है।एक कुम्भकार कुम्भ