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Gita / Chapter 10.5
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

अहिंसा समता तुष्टिस्तपो दानं यशोऽयशः | भवन्ति भावा भूतानां मत्त एव पृथग्विधाः

Transliteration

ahiṃsā samatā tuṣṭistapo dānaṃ yaśo.ayaśaḥ . bhavanti bhāvā bhūtānāṃ matta eva pṛthagvidhāḥ

English

Non-injury, eanimity, satisfaction, austerity, charity, fame, infamy-(these) different dispositions of beings spring from Me alone.

Hindi

अहिंसा, समता, सन्तोष, तप, दान. यश और अपयश ऐसे ये प्राणियों के नानाविध भाव मुझ से ही प्रकट होते हैं।।

Sanskrit
English
अहिंसा
noninjury
समता
eanimity
तुष्टिः
contentment
तपः
austerity
दानम्
beneficence
यशः
fame
अयशः
illfame
भवन्ति
arise
भावाः
alities
भूतानाम्
of beings
मत्तः
from Me
एव
alone
पृथग्विधाः
of different kinds.
Hindi

प्रस्तुत प्रकरण के विचार को ही आगे बढ़ाते हुए कि परमात्मा ही सम्पूर्ण विश्व का उपादान और निमित्त कारण है? भगवान् श्रीकृष्ण इन दो श्लोकों में उन विविध गुणों को गिनाते हैं? जो मनुष्य के मन और बुद्धि में व्यक्त होते हैं।साधारणत? सृष्टि शब्द से केवल हम भौतिक जगत् ही समझते हैं। परन्तु उपर्युक्त समस्त गुण उसके व्यापक एवं सर्वग्राहक अर्थ को सूचित करते हैं। उनसे यह स्पष्ट ज्ञात होता है कि जगत् शब्द के अर्थ में हमारे मानसिक और बौद्धिक जीवन भी सम्मिलित हैं।पुन सभी मनुष्यों और प्राणियों का वर्गीकर