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Gita / Chapter 10.16
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Sanskrit
Hindi
Sanskrit

वक्तुमर्हस्यशेषेण दिव्या ह्यात्मविभूतयः | याभिर्विभूतिभिर्लोकानिमांस्त्वं व्याप्य तिष्ठसि

Transliteration

vaktumarhasyaśeṣeṇa divyā hyātmavibhūtayaḥ . yābhirvibhūtibhirlokānimāṃstvaṃ vyāpya tiṣṭhasi

English

Be pleased to speak in full of Your own manifestations which are indeed divine, through which manifestations You exist pervading these worlds.

Hindi

आप ही उन अपनी दिव्य विभूतियों को अशेषत: कहने के लिए योग्य हैं, जिन विभूतियों के द्वारा इन समस्त लोकों को आप व्याप्त करके स्थित हैं।।

Sanskrit
English
वक्तुम्
to tell
अर्हसि (Thou)
shouldst
अशेषेण
without reminder
दिव्याः
divine
हि
indeed
आत्मविभूतयः
Thy glories
याभिः
by which
विभूतिभिः
by glories
लोकान्
worlds
इमान्
these
त्वम्
Thou
व्याप्य
having pervaded
तिष्ठसि
existest.No
Hindi

राजपुत्र अर्जुन को इस बात का निश्चय हो गया है कि भगवान् ही विश्व के अधिष्ठान हैं? जिनके बिना विश्व का अस्तित्व सिद्ध नहीं हो सकता। परन्तु जब वह अपने उपलब्ध और परिचित प्रमाणों इन्द्रियों? मन और बुद्धि के द्वारा बाह्य जगत् को देखता है? तब उसे केवल विषयों? भावनाओं और विचारों का ही अनुभव होता है जिन्हें किसी भी दृष्टि से दिव्य नहीं कहा जा सकता।जब किसी उत्सव के अवसर पर किसी इमारत पर विद्युत् की दीपसज्जा की जाती है? तब वहाँ विविध रंगों के तथा विभिन्न विद्युत् क्षमताओं के बल्बों से प्रकाश